और फिर मूँद के खुद से बोलूँ
सोजा दो पल और खिलाडी
कर ले उठने की तय्यारी
पर जब टूटे नींद नशे की
वक़्त सामने आये
वक़्त सामने आकर मेरे मंद मंद मुस्काए
और हाथ में लिए बीन एक मुझको बड़ा नचाये
आज सुबह में फिर यूँ भागी सर पर रख कर पैर
कौन बताये किस से पूंछूं
कैसा समय का मुझसे बैर
आगामी है इम्तिहान और सर पर नींद सवार
कौन बताये किस्से पूंछूं
कैसा समय का आत्याचार
ब्रूस ली लगे मामूली
लगे फीका शक्तिमान
एक बात तो सच है भैया
समय बड़ा बलवान
जब भी देखूं वक़्त घडी में
मुझे देख वो सरपट दौड़े
यूँ नहीं की बैठे दो पल
करे वो मुझसे बात
कर लो बेटा काम अधूरा
जल्दी की क्या बात
मगर नहीं लगती है उसको इंसानों की दुनिया प्यारी
न शौक है उसको सिनेमा का
न गाने सुनने की बीमारी
उसको तो बस एक है काम
जिससे दुनिया में उसका नाम
वक़्त उसीके साथ चला है
वक़्त उसीके साथ चलेगा
चलते रहना जिसका काम
Dear Harshita, Good one. Keep it up.
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